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गोमुखासन करने का तरीका लाभ व सावधानियां

  •       गोमुखासन करने का तरीका लाभ व सावधानियां

    • इस लेख में गोमुखासन करने का तरीका लाभ व सावधानियां का वर्णन किया है इस लेख में हम आपको यह बताना चाहते हैं कि गोमुखासन करने का सही तरीका वह इससे हमारे शरीर पर क्या लाभ पड़ता है परंतु इसको करने के लिए क्या सावधानियां भी अपनानी चाहिए। गोमुखासन करने का तरीका लाभ व सावधानियां का वर्णन हमने आगे किया है।

        गौमुखासन संस्कृत का एक शब्द है, जब गोमुखासन का विच्छेद करते हैं तो यह दो शब्दों में विभक्त होता है गौमुख तथा आसन जैसा कि हम जानते हैं आसन, योग का एक अंग है तथा गोमुख को यदि फिर से  विच्छेद किया जाए तो गौ तथा मुख बनता है गौ का अर्थ गाय तथा मुख  यानी गाय का मुँह होता है। अर्थात इस आसन में अभ्यासी पांव की स्थिति बहुत हद तक गाय के मुख के समान आकृति होती है इसलिए इसे गोमुखासन तथा  अंग्रेजी में Cow Face Pose कहते हैं।

      गोमुखासन हठयोग में बहुत ही प्रचलित आसन है, इस आसन में योगी की स्थिति गाय के  मुख के समान दिखाई देती है, यह बहुत ही सरल आसान है तथा महिलाओं के लिए विशेष  लाभदायक है यह कंधे और जंघाओं  की मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है। 


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    गौमुखासन करने की सरल व सही विधि

    • •  गौमुखासन का अभ्यास करने के लिए  स्वच्छ खुले हवादार वातावरण में बैठे हैं।

      • सबसे पहले दंडासन की स्थिति में बैठ जाएं दोनों पैर आगे की ओर खुले हुए तथा हाथ बगल में रखे हुए।

      • बाय पैर के घुटने को मोड़ते हुए दाएं नितंब के बगल में जमीन पर रखें। 

      • इसी तरह दाएं पांव के घुटने को मोड़ने हुए बाएं पांव के ऊपर से लाएं तथा दाई एड़ी को बाएं  नितंब के पास रखें ।

      • अब दोनों घुटने एक दूसरे से ठीक ऊपर नीचे होने चाहिए तथा दोनों पैर नितंबों के बगल में सटे हुए होने चाहिए।

      • दाएं हाथ को सीधा ऊपर उठाकर कोहनी से मोड़ते हुए पीठ की तरफ ले जाएं।

      • बाएं हाथ को नीचे से मोड़कर पीठ की तरफ ले जाएं।

      • अब दोनों हाथों को खींचकर आपस में मिलाने की कोशिश करें और पीठ के पीछे हाथों को कलाई से पकड़े अन्यथा उंगलियों से इंटरलॉक करें।

      • कोशिश करें कि जो हाथ ऊपर है उसकी कोहनी तथा सिर एक सीध में ठीक ऊपर रहे।

      • अब इस आसन में यथास्थिति 10 से 15 श्वास तक रुके रहे।

      • अब पांव तथा हाथों की स्थिति को बदलकर दूसरी तरफ से भी करें।

      • अब यह एक चक्र पूरा हुआ इसी प्रकार हमें 1 दिन में कम से कम 5 बार इसका अभ्यास करना चाहिए।

      • अपना दोनों पैर सीधे करें तथा हाथों को भी बगल में रखें यहां गोमुखासन का अभ्यास पूर्ण होता है। 

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    गोमुखासन करने से लाभ:--

घेरंड ऋषि ने घेरंड संहिता में अपने 15 आसनों की सूची में गोमुखासन को भी स्थान दिया है, हमें इसी बात से अनुमान लगा लेना चाहिए की गोमुखासन कितना लाभकारी और प्रभावकारी आसन है।गोमुखासन करने का तरीका लाभ व सावधानियां

ऐसे तो गोमुखासन के अनेक लाभ हैं परंतु यहां कुछ प्रमुख लाभों का वर्णन ही  किया गया है।

    1. अस्थमा के रोग में:-- अस्थमा के रूप में गोमुखासन बहुत ही लाभदायक है यह श्वसन संबंधी रोगों के लिए रामबाण माना गया है इससे फेफड़ों की सफाई होती है, यह छाती को पुष्ट बनाता है, जिससे फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है, अस्थमा से पीड़ित रोगी को यह अभ्यास जरूर करना चाहिए।

    2. गोमुखासन मधुमेह के लिए:-- गोमुखासन के अभ्यास से पैंक्रियास उत्तेजित होते हैं जिससे मधुमेह नियंत्रण में रखने में सहायक होता है।

    3. हाथों की मजबूती के लिए:-- इस आसन के अभ्यास से बाहों की मांसपेशियों में मजबूती आती है।

    4.कूल्हों के स्वास्थ्य के लिए:-- गोमुखासन के अभ्यास से कुल्लू के दर्द में राहत मिलती है।

    5. मेरुदंड (रीढ़) के लिए:-- यह मेरुदंड की हड्डी को सीधा रखता है तथा उसको मजबूत भी बनाता है।

    6. यौन दुर्बलता में गोमुखासन के लाभ:-- गोमुखासन के अभ्यास से अपान वायु सक्रिय होती है जिसके कारण स्त्री अथवा पुरुष में किसी भी प्रकार की यौन दुर्बलता होने पर उसमें स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

    7. सर्वाइकल के रोग में:-- गोमुखासन में बैठने की मुद्रा ऐसी होती है की योगी की रीढ़ की हड्डी एकदम सीधी होती है जिसके कारण उसको सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस कमर दर्द गर्दन दर्द कंधों की जकड़न आदि में राहत मिलती है।

    8. कमर दर्द में:-- इसके नियमित अभ्यास से कमर दर्द में धीरे-धीरे आराम मिलने लगता है।

    9. मधुमेह के लिए गोमुखासन:-- गोमुखासन करने से यह पैंक्रियास को उत्तेजित करता है जिसके कारण मधुमेह रोग नियंत्रण करने में सहायक होता है।

    10. शरीर को लचकदार बनाने में:-- गौमुखासन के नियमित अभ्यास से शरीर लचकदार वह सुडौल बनता है।

    अन्य लाभ:--

      गोमुखासन का अभ्यास करने से पहले ध्यान रखने वाली कुछ बातें:-- गोमुखासन करने का तरीका लाभ व सावधानियां कुछ लोग प्रारंभिक अवस्था में गोमुखासन का अभ्यास करते हैं तब उनके कूल्हे समान रूप से फर्श पर नहीं लगते हैं इसके कारण उनके घुटने भी एक दूसरे के ऊपर नहीं आते हैं अगर ऐसी अवस्था आपके साथ होती है तो कंबल की एक पतली तह लगाकर आप हिप्स के नीचे रख सकते हैं जिससे आपको आसन सही से करने में सुविधा मिलेगी।

      गोमुखासन करने का तरीका लाभ व सावधानियां अगर आपके कंधे लचीले नहीं हो या आपको हाथ पीछे ले जाने में कठिनाई हो रही हो तो आप कोई रुमाल या योगा बेल्ट लेकर उससे दोनों हाथों के छोर से पकड़ सकते हैं।

      गोमुखासन के अभ्यास में सावधानियां

      यहां कुछ सावधानियों का वर्णन किया जा रहा है जो गोमुखासन के अभ्यास में सावधानियां की जानी चाहिए।

      * प्रारंभ में आपको आपने  योग शिक्षक के सानिध्य में इसका अभ्यास करना चाहिए।

      * यदि आप की पहले की सर्जरी हुई है या हाल फिलहाल में भी कोई सर्जरी हुई है तो आपको अपने चिकित्सक से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

      * अगर आपके कंधे घुटने गर्दन आदि में अधिक दर्द रहता है तो इस आसन को ना करें।

      * अगर आप पीठ के दर्द से पीड़ित हैं तो पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य ले और उनके कहने के  बाद ही इसका अभ्यास करें।

      * गर्भावस्था के प्रारंभिक 3 महीने इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए इसके बाद भी अपनी डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

      * यदि खूनी बवासीर की समस्या हो तो इसका अभ्यास न करें।

      * हाथों को रखने और पांव को एकदम सही स्थिति में लाने के लिए अनावश्यक जोर जबरदस्ती ना लगाएं।

      गोमुखासन से पूर्व किए जाने वाले कुछ आसन:-- 

        • बद्धा कोणासन(butterfly pose)
        •  विरासन (warrior pose)
        • सुप्त पादंगुष्ठासन

          गोमुखासन के बाद किए जाने वाले कुछ आसन:-- 

            •  अर्धमत्स्येंद्रासन(Lord of fishes pose)
            •  गरुड़ासन(eagle pose)
            •  मरीच्यासन 
            •  पद्मासन(lotuspose)
            •  पश्चिमोत्तानासन 

                  गोमुखासन करने का तरीका लाभ व सावधानियां गोमुखासन का नियमित अभ्यास छाती को खोलता है और कमर की हड्डी को भी सीधा करता है जिससे योगी का शारीरिक बनावट सही होती है उसकी उठने बैठने की मुद्रा में सुधार होता है यह पैरों की अकडन को भी कम करता है और हाथों और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करता है इसके नियमित अभ्यास से थकान तनाव चिंता कमजोरी आदि समस्याएं दूर होती हैं यह दृढ़ इच्छाशक्ति का भी विकास करता है।

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