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Showing posts with the label अष्टांगयोग

paranayama different types | प्राणायाम के प्रकार अष्टांगयोग मे |

Paranayama different types प्राणायाम :--   अष्टांगयोग मे योग की चर्चा करते हुए हमने अध्यन किया यम, नियम, आसान के बारे में अब हम अष्टांग योग के चौथे अंग प्राणायाम के परिचय पर चर्चा करेंगे। प्राणायाम के अभ्यास से चित्त को नियंत्रित किया जा सकता है, जैसा कि हठ प्रदीपिका मे भी कह…

अष्टांगयोग का तीसरा अंग आसन |

अष्टांगयोग का तीसरा अंग आसन महर्षि पतंजलि ने योगसूत्र के अष्टांग योग में योग के आठ अङ्गों का वर्णन करते हुए योग को विस्तृत रूप में वर्णन किया है। पहले के पोस्ट पढ़ने के लिए  इन पोस्ट को पढ़े। अब यहां आसन के बारे में सूक्ष्म एवम संक्षेप वर्णन दे रहे है। यह संस्कृत के अस धातु से बना है,…

अष्टांगयोग का वर्णन योगदर्शन में|

अष्टांगयोग का वर्णन योगदर्शन में योग एक अनमोल धरोहर जिसे इस संस्कृति और प्रकृति ने बड़े इफाजत से संभाल कर रखा हुआ है, योग का मुख्य उद्देश्य आत्मा का परमात्मा से मिलन माना गया है, या कहे  तो केवल्य की प्राप्ति मन गया है।  जिसके लिए योग में शारिरिक सुद्धि से लेकर मन बुद्धि की शुद्धि भी…

अष्टांगयोग-- 2

अष्टांगयोग आहिंसासत्यास्तेयब्रह्मचर्यापरिग्रहा यमा: यो.सू. २/३० विच्छेद :-- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह। ये पाँच यम है। इस सूत्र में यम के पाँच भाग बताये गए जिनका पालन करना अति आयश्यक होता है। व्याख्या:-- १.  अहिंसा:-- मानस, वाचा,कर्मणा (मन, वचन,कर्म) इन तीनो …